"उस जन्नत की सिफ़त जिसका परहेज़गारों से वादा किया गया है यह है कि उसमें ऐसे पानी की नहरें हैं जो कभी बदबूदार नहीं होता, और ऐसे दूध की नहरें हैं [35] जिसका ज़ायका कभी नहीं बदलता [36], और पीने वालों के लिए लज़ीज़ शराब (पाक शरबत) की नहरें हैं [37], और साफ़ किए हुए शहद की नहरें हैं [38]। और उसमें उनके लिए हर तरह के फल हैं [39], और उनके रब की तरफ़ से बख़्शिश है [40]। क्या यह उन जैसे हो सकते हैं जो हमेशा आग में रहेंगे और जिन्हें खौलता हुआ पानी पिलाया जाएगा जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा [41]?"
जन्नत में दूध की ऐसी असीम नहरें बह रही हैं जो किसी जानवर के थन से नहीं निकलीं, बल्कि कुदरत-ए-इलाही से चश्मों की तरह फूटती हैं।
दुनिया का दूध अगर ज़रा देर रख दिया जाए तो खट्टा हो जाता है या फट जाता है। लेकिन जन्नत का दूध सदा ताज़ा, मीठा और बेमिसाल लज़्ज़त वाला है, जिसका ज़ायका हज़ारों साल भी न बदलेगा।
यह दुनिया की नापाक और नशा पैदा करने वाली शराब की तरह नहीं है जिससे अक़्ल मारी जाए या बदबू आए; बल्कि यह इंतहाई पाकीज़ा, ख़ुशबूदार और लज़ीज़ शरबत है जो रूह को ताज़गी और बेपनाह मसर्रत बख़्शता है।
यह शहद मक्खियों का बनाया हुआ नहीं है और न ही इसमें कोई मोम, मैल या कचरा है; यह पूरी तरह मुसफ़्फ़ा, पारदर्शी और निहायत शीरीं है।
अहले-जन्नत के लिए हर मौसम, हर क़िस्म और हर पसंद के फल मौजूद होंगे। वे जब चाहेंगे, दरख़्तों की टहनियाँ ख़ुद झुककर उनके सामने आ जाएँगी।
इन तमाम नेमतों से बढ़कर नेमत अल्लाह तआला की रज़ा और मग़फ़िरत है, जिसके बाद कभी कोई नाराज़गी या ख़ौफ़ नहीं होगा।
इसके मुक़ाबले जहन्नमियों को इंतहाई खौलता हुआ पीप और पानी (ह़मीम) पिलाया जाएगा जो मुँह के पास आते ही चेहरे की खाल झुलसा देगा और पेट में जाते ही आँतों को काटकर मलद्वार से बाहर निकाल देगा। क्या ये दोनों गिरोह कभी बराबर हो सकते हैं?
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