कुरान - 47:17 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَٱلَّذِينَ ٱهۡتَدَوۡاْ زَادَهُمۡ هُدٗى وَءَاتَىٰهُمۡ تَقۡوَىٰهُمۡ

Transliteration: (Wallazeenah tadaw zaadahum hudanw wa aataahum taqwaahum)

और जिन लोगों ने हिदायत पाई, अल्लाह ने उनकी हिदायत में और इज़ाफ़ा फ़रमाया और उन्हें उनका तक़वा अता फ़रमाया [47]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 17

"और जिन लोगों ने हिदायत पाई, अल्लाह ने उनकी हिदायत में और इज़ाफ़ा फ़रमाया और उन्हें उनका तक़वा अता फ़रमाया [47]।"


[47] सोहबत-ए-नबवी ﷺ से हिदायत और तक़वे में तरक़्क़ी

इस आयत में सच्चे मोमिनों और सहाबा किराम की शान बयान की गई है। जिन्होंने खुलूस-ए-दिल से हिदायत को अपनाया, अल्लाह तआला ने उनके इल्म, यक़ीन और परहेज़गारी में और ज़्यादा इज़ाफ़ा फ़रमा दिया।

यह तरक़्क़ी हुज़ूर अकरम ﷺ की मुबारक सोहबत और आपकी नूरानी तक़रीरों की बरकत से हासिल होती थी। वही मुबारक कलाम जो मुनाफ़िक़ों के लिए बदबख़्ती का कारण बना, मोमिनों के ईमान को चमकाने और दर्जे बुलंद करने का ज़रिया बन गया।

जैसे सूरज की रौशनी हर चीज़ को जीवन देती है मगर चमगादड़ के लिए तारीकी बन जाती है, वैसे ही कुरआन का नूर सच्चे दिलों को जीवन बख़्शता है जबकि अंधे दिलों के निफ़ाक़ को ज़ाहिर कर देता है। यहाँ हिदायत व तक़वे का इज़ाफ़ा कैफ़ियत (गहराई, यक़ीन और निष्ठा) के एतबार से है।

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