Transliteration: (Allazeena kafaroo wa saddoo'an sabeelil laahi adalla a'maalahum)
"जिन लोगों ने कुफ़्र किया और अल्लाह के रास्ते से रोका [1], अल्लाह ने उनके आमाल बर्बाद कर दिए [2] [3]।"
यह आयत विशेष रूप से मक्का के मुशरिकीन और काफ़िरों के बारे में नाज़िल हुई, जिन्होंने न केवल स्वयं इस्लाम का इनकार किया, बल्कि दूसरों को भी अल्लाह के रास्ते (दीन-ए-इस्लाम) को स्वीकार करने से रोका।
लेकिन यह हुक्म कयामत तक आने वाले हर उस शख़्स पर लागू होता है जो कुफ़्र अपनाए और हक़ के प्रचार में बाधा डाले।
यहाँ 'अदल्ला' का अर्थ है उनके आमाल को ज़ाया और अकारथ कर देना। इसका भावार्थ यह है कि:
यदि काफ़िर दुनिया में कोई अच्छा काम भी करते—जैसे भूखों को खाना खिलाना, ग़रीबों की मदद करना या रिश्तेदारों से भलाई करना—तो ईमान के बिना आख़िरत में उन आमाल का कोई मूल्य या सवाब नहीं मिलता।
ईमान नेकी के स्वीकार होने की बुनियादी शर्त है; बिना ईमान के किए गए तमाम दुनियावी भले काम आख़िरत के दिन धूल की तरह उड़ा दिए जाएँगे।
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