कुरान - 47:7 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِن تَنصُرُواْ ٱللَّهَ يَنصُرۡكُمۡ وَيُثَبِّتۡ أَقۡدَامَكُمۡ

Transliteration: (Yaaa ayyuhal lazeena aamanooo in tansurul laaha yansurkum wa yusabbit aqdaamakum)

ऐ ईमान वालो! अगर तुम अल्लाह (के दीन) की मदद करोगे, तो वह तुम्हारी मदद फ़रमाएगा [19] और तुम्हारे क़दम जमा देगा [20]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 7

"ऐ ईमान वालो! अगर तुम अल्लाह (के दीन) की मदद करोगे, तो वह तुम्हारी मदद फ़रमाएगा [19] और तुम्हारे क़दम जमा देगा [20]।"


[19] अल्लाह के दीन की मदद करना और इलाही नुसरत पाना

अल्लाह तआला तमाम जहानों से बेपरवाह और बेनियाज़ है; उसे किसी की मदद की ज़रूरत नहीं। यहाँ 'अल्लाह की मदद' से मुराद अल्लाह के प्यारे रसूल ﷺ की मदद करना, शरीअत की हिमायत करना और दीन-ए-इस्लाम का प्रचार व प्रसार करना है।

जब मोमिन अपनी जान, माल, ज़बान और क़लम से इस्लाम की ख़िदमत करते हैं, तो अल्लाह तआला अपनी ग़ैबी मदद (नुसरत-ए-इलाही) उनके साथ शामिल फ़रमा देता है और उन्हें दुश्मनों पर ग़लबा अता करता है।


[20] क़दमों का जमाना (सबात-ए-क़दम)

क़दम जमाने के कई आयाम हैं:

  • मैदान-ए-जंग में: जब तादाद कम हो और दुश्मन का लश्कर विशाल हो, तब भी मोमिनों के दिलों में ऐसा हौसला और सबात अता फ़रमाना कि वे पीठ न फेरें।
  • आज़माइश और फ़ितनों में: दुनिया के लालच, तकलीफ़ों और गुमराहियों के तूफ़ानों में ईमान और अक़ीदे पर अटल रखना।
  • पुल-सिरात पर: आख़िरत में पुल-सिरात की तेज़ धार पर क़दमों को न फिसलने देना और बिजली की गति से पार करा देना।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now