कुरान - 47:6 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَيُدۡخِلُهُمُ ٱلۡجَنَّةَ عَرَّفَهَا لَهُمۡ

Transliteration: (Wa yudkhiluhumul jannata 'arrafahaa lahum)

और उन्हें उस जन्नत में दाख़िल फ़रमाएगा जिसकी उसने उन्हें पहचान करा दी है [18]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 6

"और उन्हें उस जन्नत में दाख़िल फ़रमाएगा जिसकी उसने उन्हें पहचान करा दी है [18]।"


[18] जन्नत के महलों और रास्तों की अद्भूत पहचान

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'अ़र्रफ़हा लहुम' के दो मुख्य अर्थ हैं:

  1. पहचान और रास्ता जानना: जब अहले-जन्नत जन्नत में दाख़िल होंगे, तो वे अपने-अपने महलों, बाग़ों और ठिकानों को इस तरह आसानी से पहचान लेंगे जैसे कोई व्यक्ति दुनिया में अपने पुश्तैनी घर को पहचानता है। उन्हें किसी रहनुमा या पूछने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी; अल्लाह उनके दिलों में उनके महलों का पूरा नक़्शा और रास्ता इल्हाम फ़रमा देगा।
  2. अत्यंत सुगंधित बनाना: लफ़्ज़ 'अरफ़' अरबी में पाकीज़ा ख़ुशबू को भी कहते हैं। इसका अर्थ यह भी है कि अल्लाह ने उस जन्नत को ऐसी रूहानी व बेमिसाल ख़ुशबूओं से महका दिया है कि जिसकी लज़्ज़त और महक सैकड़ों सालों की दूरी से महसूस होती है।

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