कुरान - 47:8 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَتَعۡسٗا لَّهُمۡ وَأَضَلَّ أَعۡمَٰلَهُمۡ

Transliteration: (Wallazeena kafaroo fata' sal lahum wa adalla a'maalahum)

और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो उनके लिए हलाकत है, और अल्लाह उनके आमाल को अकारथ (बेकार) कर देगा [21]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 8

"और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, तो उनके लिए हलाकत है, और अल्लाह उनके आमाल को अकारथ (बेकार) कर देगा [21]।"


[21] कुफ़्र का अंजाम: रुसवाई और आमाल की निष्फलता

इस आयत में काफ़िरों के लिए दो अटल परिणाम बताए गए हैं:

  1. हलाकत और ज़िल्लत ('तअ़सल लहुम'):
    • काफ़िरों का अंतिम ठिकाना ज़िल्लत और पतन है—चाहे दुनिया में उनकी हुकूमत व साज़िशें तबाह हों या आख़िरत में जहन्नम की असीमित रुसवाई।
    • दुनिया में उनकी ज़ाहिरी चमक-दमक या दौलत केवल चंद रोज़ का छलावा है जो उन्हें और गहरे गर्त में धकेल देती है।
  2. आमाल का अकारथ होना:
    • काफ़िरों के दुनियावी अच्छे काम (दान-पुण्य, अनाथों की मदद) ईमान के अभाव में अल्लाह की बारगाह में शून्य हैं।
    • जैसे बिना वुज़ू के नमाज़ बातिल होती है, वैसे ही बिना ईमान के कोई भी अमल मक़बूल नहीं होता।

सबक़: दुनियावी कामयाबी ईमान के बग़ैर खोखली है। मोमिन की मुश्किलें अस्थायी हैं जो दर्जे बुलंद करती हैं, जबकि काफ़िर की दुनियावी राहत एक फंदा है जो अज़ाब से पहले दी जाती है।

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