कुरान - 47:3 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱتَّبَعُواْ ٱلۡبَٰطِلَ وَأَنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّبَعُواْ ٱلۡحَقَّ مِن رَّبِّهِمۡۚ كَذَٰلِكَ يَضۡرِبُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ أَمۡثَٰلَهُمۡ

Transliteration: (Zaalika bi annal lazeena kafarut taba'ul baatila wa annal lazeena aamanut taba'ul haqqa mir Rabbihim; kazaalika yadribul laahu linnaasi amsaalahum)

यह इसलिए कि काफ़िरों ने बातिल की पैरवी की [7], और ईमान वालों ने उस हक़ की पैरवी की जो उनके रब की तरफ़ से है [8]। इस तरह अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान फ़रमाता है [9]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 3

"यह इसलिए कि काफ़िरों ने बातिल की पैरवी की [7], और ईमान वालों ने उस हक़ की पैरवी की जो उनके रब की तरफ़ से है [8]। इस तरह अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान फ़रमाता है [9]।"


[7] काफ़िर बातिल के पैरोकार हैं

काफ़िरों को बातिल (झूठ और असत्य) का पैरोकार बताया गया है, जिसमें शामिल हैं:

  • शैतान की पैरवी करना और उसके बहकावे में आना।
  • अपनी नफ़्सानी और सांसारिक ख़्वाहिशात के ग़ुलाम बने रहना।
  • गुमराह सरदारों और पूर्वजों की ग़लत रीतियों का अंधानुकरण करना।

चूँकि उनका रास्ता अल्लाह की हिदायत से कटा हुआ है, इसलिए आख़िरत में उनके सारे कथित अच्छे काम मरीचिका (धोखे) की तरह बेकार हो जाते हैं।


[8] ईमान वाले अपने रब के हक़ पर चलते हैं

इसके विपरीत, मोमिन हक़ के सीधे रास्ते पर चलते हैं, जो इन स्रोतों पर आधारित है:

  • कुरआन मजीद
  • सुन्नत-ए-रसूल ﷺ
  • उम्मत का इज्माअ (सर्वसम्मति)
  • मुजतहिदीन का क़ियास (शरिया अनुरूप विवेचन)

इसके अलावा, हक़ की जीती-जागती तस्वीर हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारक है—आपकी हर बात और हर अमल सरासर हक़ है। जिस तरह रौशनी सूरज से और ख़ुशबू फूल से कभी अलग नहीं हो सकती, उसी तरह हक़ आक़ा-ए-दो-आलम ﷺ से कभी जुदा नहीं हो सकता।


[9] अल्लाह तआला का दोनों रास्तों को साफ़-साफ़ बयान फ़रमाना

अल्लाह तआला ने कुरआन में काफ़िरों और मोमिनों दोनों की मिसालें और अहवाल इसलिए स्पष्ट बयान किए हैं ताकि:

  • लोग पिछले लोगों के बुरे अंजाम से इब्रत व सबक़ हासिल करें।
  • काफ़िरों के विनाशकारी तरीक़ों और कुफ़्र से बचें।
  • सच्चे मोमिनों के नेक गुणों और अख़लाक़ को अपनाएँ।

यह अल्लाह की तरफ़ से तालीम व तरबियत का इलाही तरीक़ा है ताकि इंसान नजात के रास्ते को पहचान कर उस पर स्थिर रहे।

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