Transliteration: (Zaalika bi annal lazeena kafarut taba'ul baatila wa annal lazeena aamanut taba'ul haqqa mir Rabbihim; kazaalika yadribul laahu linnaasi amsaalahum)
"यह इसलिए कि काफ़िरों ने बातिल की पैरवी की [7], और ईमान वालों ने उस हक़ की पैरवी की जो उनके रब की तरफ़ से है [8]। इस तरह अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान फ़रमाता है [9]।"
काफ़िरों को बातिल (झूठ और असत्य) का पैरोकार बताया गया है, जिसमें शामिल हैं:
चूँकि उनका रास्ता अल्लाह की हिदायत से कटा हुआ है, इसलिए आख़िरत में उनके सारे कथित अच्छे काम मरीचिका (धोखे) की तरह बेकार हो जाते हैं।
इसके विपरीत, मोमिन हक़ के सीधे रास्ते पर चलते हैं, जो इन स्रोतों पर आधारित है:
इसके अलावा, हक़ की जीती-जागती तस्वीर हुज़ूर अकरम ﷺ की ज़ात-ए-मुबारक है—आपकी हर बात और हर अमल सरासर हक़ है। जिस तरह रौशनी सूरज से और ख़ुशबू फूल से कभी अलग नहीं हो सकती, उसी तरह हक़ आक़ा-ए-दो-आलम ﷺ से कभी जुदा नहीं हो सकता।
अल्लाह तआला ने कुरआन में काफ़िरों और मोमिनों दोनों की मिसालें और अहवाल इसलिए स्पष्ट बयान किए हैं ताकि:
यह अल्लाह की तरफ़ से तालीम व तरबियत का इलाही तरीक़ा है ताकि इंसान नजात के रास्ते को पहचान कर उस पर स्थिर रहे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat