कुरान - 47:13 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَكَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ هِيَ أَشَدُّ قُوَّةٗ مِّن قَرۡيَتِكَ ٱلَّتِيٓ أَخۡرَجَتۡكَ أَهۡلَكۡنَٰهُمۡ فَلَا نَاصِرَ لَهُمۡ

Transliteration: (Wa ka ayyim min qaryatin hiya ashaddu quwwatam min qaryatikal lateee akhrajatka ahlaknaahum falaa naasira lahum)

और कितनी ही बस्तियाँ जो ताक़त में आपकी उस बस्ती (मक्का) से कहीं ज़्यादा थीं जिसने आपको निकाल दिया, हमने उन्हें हलाक कर दिया, तो उनका कोई मददगार न हुआ [32]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 13

"और कितनी ही बस्तियाँ जो ताक़त में आपकी उस बस्ती (मक्का) से कहीं ज़्यादा थीं जिसने आपको निकाल दिया, हमने उन्हें हलाक कर दिया, तो उनका कोई मददगार न हुआ [32]।"


[32] हुज़ूर अकरम ﷺ की मक्का से हिजरत और दिल की तसल्ली

जब हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को काफ़िरों के ज़ुल्म के कारण मक्का मुकर्रमा से हिजरत करनी पड़ी, तो आपने मक्का की तरफ़ रुख़ करके ग़मगीन आवाज़ में फ़रमाया था: "ऐ मक्का! तू मुझे तमाम ज़मीन से ज़्यादा महबूब है, अगर तेरे रहने वाले मुझे यहाँ से न निकालते तो मैं कभी तुझे छोड़कर न जाता।"

इस पर अल्लाह तआला ने अपने हबीब ﷺ को तसल्ली देते हुए यह आयत नाज़िल फ़रमाई कि ऐ प्यारे रसूल! जिन लोगों ने आपको निकाला है, आप उनकी ज़ाहिरी ताक़त से ग़म न करें। आपसे पहले गुज़री हुई क़ौमें (जैसे आद व समूद) ताक़त, दौलत और आबादी में मक्का वालों से कहीं बढ़कर थीं, लेकिन जब उन्होंने अपने नबियों को झुठलाया तो हमने उन्हें तबाह कर दिया और कोई उनकी मदद को न आ सका। मक्का के इन मुशरिकीन की क्या हैसियत है!

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