कुरान - 47:24 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ ٱلۡقُرۡءَانَ أَمۡ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقۡفَالُهَآ

Transliteration: (Afalaa yatadabbaroonal Qur-aana am 'alaa quloobin aqfaaluhaa)

तो क्या वे कुरआन में ग़ौर-ओ-फ़िक्र (तदब्बुर) नहीं करते, या उनके दिलों पर ताले लगे हुए हैं [64]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 24

"तो क्या वे कुरआन में ग़ौर-ओ-फ़िक्र (तदब्बुर) नहीं करते, या उनके दिलों पर ताले लगे हुए हैं [64]?"


[64] कुरआन में तदब्बुर और दिलों के ताले

कुरआन मजीद हिदायत का सरचश्मा है, लेकिन उसका फ़ैज़ उन्हीं को मिलता है जो खुले दिल से उसमें ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें।

  • मुनाफ़िक़ों और मुनकिरों के दिलों पर कुफ़्र, बुग़्ज़, अहंकार और ज़िद के जंग आलूद ताले पड़े हुए हैं।
  • जब तक दिल से नफ़रत और अहंकार का ताला न टूटे, कुरआन का नूर अंदर दाख़िल नहीं हो सकता।
  • जब बंदा आजिज़ी और इख़्लास के साथ कुरआन के सामने झुकता है, तो उसके दिल के ताले खुल जाते हैं और रूहानी ज़िंदगी नसीब होती है।

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