कुरान - 47:23 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فَأَصَمَّهُمۡ وَأَعۡمَىٰٓ أَبۡصَٰرَهُمۡ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena la'anahumul laahu fa asammahum wa a'maaa absaarahum)

यही वे लोग हैं जिन पर अल्लाह ने लानत फ़रमाई है, तो उन्हें (हक़ सुनने से) बहरा कर दिया और उनकी आँखों को (हक़ देखने से) अंधा कर दिया [63] [64]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 23

"यही वे लोग हैं जिन पर अल्लाह ने लानत फ़रमाई है, तो उन्हें (हक़ सुनने से) बहरा कर दिया और उनकी आँखों को (हक़ देखने से) अंधा कर दिया [63] [64]।"


[63] अल्लाह की लानत (रहमत से दूरी)

जो लोग ज़मीन में ज़ुल्म व फ़साद करते हैं और रिश्ते-नाते तोड़ते हैं, वे अल्लाह की रहमत से दूर (मलऊन) हो जाते हैं।


[64] बहरा और अंधा कर देना

उनके कान ज़ाहिरी आवाज़ें तो सुनते हैं, मगर कुरआन और हक़ की नसीहत को क़बूल करने से बहरे हैं। इसी तरह उनकी आँखें दुनियावी चीज़ें तो देखती हैं, मगर अल्लाह की निशानियों और हक़ के नूर को देखने से अंधी हो चुकी हैं। जब बातिनी बसारत छीन ली जाए, तो कोई दलील काम नहीं आती।

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