Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena la'anahumul laahu fa asammahum wa a'maaa absaarahum)
"यही वे लोग हैं जिन पर अल्लाह ने लानत फ़रमाई है, तो उन्हें (हक़ सुनने से) बहरा कर दिया और उनकी आँखों को (हक़ देखने से) अंधा कर दिया [63] [64]।"
जो लोग ज़मीन में ज़ुल्म व फ़साद करते हैं और रिश्ते-नाते तोड़ते हैं, वे अल्लाह की रहमत से दूर (मलऊन) हो जाते हैं।
उनके कान ज़ाहिरी आवाज़ें तो सुनते हैं, मगर कुरआन और हक़ की नसीहत को क़बूल करने से बहरे हैं। इसी तरह उनकी आँखें दुनियावी चीज़ें तो देखती हैं, मगर अल्लाह की निशानियों और हक़ के नूर को देखने से अंधी हो चुकी हैं। जब बातिनी बसारत छीन ली जाए, तो कोई दलील काम नहीं आती।
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