कुरान - 47:26 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ قَالُواْ لِلَّذِينَ كَرِهُواْ مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ سَنُطِيعُكُمۡ فِي بَعۡضِ ٱلۡأَمۡرِۖ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ إِسۡرَارَهُمۡ

Transliteration: (Zaalika bi annahum qaaloo lillazeena karihoo maa nazzalal laahu sanutee'ukum fee ba'dil amri wallaahu ya'lamu israarahum)

यह इसलिए कि उन्होंने उन लोगों से कहा जो अल्लाह की नाज़िल की हुई चीज़ से नफ़रत करते हैं: "हम बाज़ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे" [67]। और अल्लाह उनकी छुपी साज़िशों को ख़ूब जानता है [68]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 26

"यह इसलिए कि उन्होंने उन लोगों से कहा जो अल्लाह की नाज़िल की हुई चीज़ से नफ़रत करते हैं: 'हम बाज़ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे' [67]। और अल्लाह उनकी छुपी साज़िशों को ख़ूब जानता है [68]।"


[67] इस्लाम के दुश्मनों से गुप्त साँठगाँठ

यहाँ मुनाफ़िक़ों और मदीना के यहूदियों की उस गुप्त साज़िश का ज़िक्र है जो उन्होंने मक्का के मुशरिकीन से मिलकर रची थी। उन्होंने काफ़िरों से कहा कि हम इस्लाम और हुज़ूर ﷺ के ख़िलाफ़ अंदरूनी तौर पर तुम्हारी मदद करेंगे। ग़ज़वा-ए-ख़ंदक़ (अहज़ाब) में बातिल के ये तमाम गिरोह एक होकर मुसलमानों को ख़त्म करने आए थे, लेकिन अल्लाह ने मोमिनों को फ़तह अता की।


[68] अल्लाह की कुदरत और साज़िशों का इल्म

वे चाहे जितनी गुप्त बैठकें करें और कोडवर्ड में साज़िशें रचें, अल्लाह तआला उनके हर भेद और दिल के इरादे से पूरी तरह वाक़िफ़ है। वह उन्हें दुनिया में ज़लील करेगा और आख़िरत में भयानक अज़ाब देगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now