कुरान - 47:28 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱتَّبَعُواْ مَآ أَسۡخَطَ ٱللَّهَ وَكَرِهُواْ رِضۡوَٰنَهُۥ فَأَحۡبَطَ أَعۡمَٰلَهُمۡ

Transliteration: (Zaalika bi annahumut taba'oo maaa askhatal laaha wa karihoo ridwaanahoo fa ahbata a'maalahum (section 3))

यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ की पैरवी की जिससे अल्लाह नाख़ुश होता है [70] और उसकी रज़ा को नापसंद किया, तो उसने उनके आमाल बर्बाद कर दिए [71]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 28

"यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ की पैरवी की जिससे अल्लाह नाख़ुश होता है [70] और उसकी रज़ा को नापसंद किया, तो उसने उनके आमाल बर्बाद कर दिए [71]।"


[70] नाराज़गी-ए-इलाही के रास्ते पर चलना

उन्होंने हमेशा उन बातों को पसंद किया जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को नापसंद थीं—जैसे कुफ़्र, शिर्क, मुनाफ़िक़त और इस्लाम के ख़िलाफ़ चालें चलना।


[71] आमाल की क़बूलियत का मदार रज़ा-ए-इलाही पर है

उनकी हर कोशिश अल्लाह की नाफ़रमानी में थी, इसलिए उनके सारे तथाकथित भले काम अकारथ कर दिए गए। यह उसूल साबित हुआ कि किसी भी अमल की क़बूलियत के लिए अल्लाह और उसके प्यारे रसूल ﷺ की रज़ा और ख़ुशनूदी शर्त है। अगर अल्लाह और रसूल राज़ी नहीं, तो पहाड़ जैसी नेकियों का भी कोई वज़न नहीं।

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