कुरान - 47:27 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
فَكَيۡفَ إِذَا تَوَفَّتۡهُمُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ يَضۡرِبُونَ وُجُوهَهُمۡ وَأَدۡبَٰرَهُمۡ

Transliteration: (Fakaifa izaa tawaffat humul malaaa'ikatu yadriboona wujoohahum wa adbaa rahum)

तो उस वक़्त क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनकी रूह क़ब्ज़ करेंगे, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते हुए [69]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 27

"तो उस वक़्त क्या हाल होगा जब फ़रिश्ते उनकी रूह क़ब्ज़ करेंगे, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते हुए [69]?"


[69] काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों की दर्दनाक मौत

इस आयत में काफ़िरों की जान निकलने के वक़्त का ख़ौफ़नाक मंज़र खींचा गया है। जब अज़ाब के फ़रिश्ते उनकी रूह निकालने आते हैं, तो नरमी से नहीं बल्कि आग के कोड़ों और लोहे के गदाओं से उनके चेहरों और पीठों पर मारते हैं। यह ज़िल्लत भरी मौत तो सिर्फ़ अज़ाब की शुरुआत है; इसके बाद बरज़ख़ और जहन्नम का न ख़त्म होने वाला अज़ाब है।

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