कुरान - 47:31 सूरह मुहम्मद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَلَنَبۡلُوَنَّكُمۡ حَتَّىٰ نَعۡلَمَ ٱلۡمُجَٰهِدِينَ مِنكُمۡ وَٱلصَّـٰبِرِينَ وَنَبۡلُوَاْ أَخۡبَارَكُمۡ

Transliteration: (Wa lanabluwannakum hattaa na'lamal mujaahideena minkum wassaabireena wa nabluwa akhbaarakum)

और हम ज़रूर तुम्हारी आज़माइश करेंगे यहाँ तक कि हम ज़ाहिर कर दें तुम में से जिहाद करने वालों को [77] [78] और सब्र करने वालों को [79], और हम तुम्हारी ख़बरों (अहवाल) को परख लें [80]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मुहम्मद आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह मुहम्मद तफ़सीर - आयत 31

"और हम ज़रूर तुम्हारी आज़माइश करेंगे यहाँ तक कि हम ज़ाहिर कर दें तुम में से जिहाद करने वालों को [77] [78] और सब्र करने वालों को [79], और हम तुम्हारी ख़बरों (अहवाल) को परख लें [80]।"


[77] आज़माइश का इलाही क़ानून

अल्लाह तआला अपने बंदों के अहवाल से पहले ही पूरी तरह बाख़बर है। यहाँ आज़माइश से मुराद बंदों के आमाल को दुनिया वालों के सामने ज़ाहिर करना है ताकि क़यामत के दिन हुज्जत पूरी हो सके।


[78] सच्चे मुजाहिदीन का ज़ाहिर होना

जब जिहाद का हुक्म आता है तो सिर्फ़ वही लोग मैदान में टिकते हैं जो सच्चे दिल से अल्लाह के रास्ते में अपनी जान कुर्बान करने का जज़्बा रखते हैं।


[79] सब्र करने वालों का मक़ाम

जो लोग जंग की सख़्तियों, ज़ख़्मों, भूख और प्यास पर अल्लाह की रज़ा के लिए सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें मुत्तक़ीन और साबिरीन की सूची में बुलंद मक़ाम अता फ़रमाता है।


[80] आमाल और दावों की परख

इम्तिहान के ज़रिए यह साफ़ हो जाता है कि कौन ज़बानी दावेदार है और कौन अमली तौर पर वफ़ादार है।

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