कुरान - 34:20 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
وَلَقَدۡ صَدَّقَ عَلَيۡهِمۡ إِبۡلِيسُ ظَنَّهُۥ فَٱتَّبَعُوهُ إِلَّا فَرِيقٗا مِّنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa laqad saddaq 'alaihim Ibleesu zannabhoo fattaba'oohu illaa fareeqam minal mu'mineen)

और बेशक इब्लीस ने उन पर अपना गुमान सच कर दिखाया [68], पस उन्होंने उसकी पैरवी की सिवाय मोमिनों के एक गिरोह के [69]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 20

"और बेशक इब्लीस ने उन पर अपना गुमान सच कर दिखाया [68]। पस उन्होंने उसकी पैरवी की सिवाय मोमिनों के एक गिरोह के [69]।"

[68] शैतान का गुमान सच साबित होना

इब्लीस ने बारगाह-ए-इलाही में तकब्बुर से यह दावा किया था कि वह इंसानों को शहवत, लालच और हसद के वसवसों में मुब्तला करके बहका देगा और अक्सर को ना-शुक्रा बना देगा। यह आयत फ़रमाती है कि अक्सर काफ़िरों और सबा वालों के मामले में उसका यह गुमान सच साबित हुआ। शैतान की यह कामयाबी उसकी किसी क़ुदरत की वजह से नहीं, बल्कि इंसानों की ग़फ़लत और नफ़्स-परस्ती की बिना पर थी।

[69] मुख़्लिस मोमिनों की हिफ़ाज़त

शैतान के तमाम मकर व फ़रेब के बावजूद सच्चे मोमिनों का एक जमाअत हमेशा महफ़ूज़ रही। यह साबित करता है कि ईमान वालों के दो गिरोह होते हैं:

  1. मुख़्लिस और नेक बंदे: जो अल्लाह की पनाह में रहे और शैतानी वसवसों के सामने सीना-सपर रहे।

  2. ग़ाफ़िल लोग: जो ज़ाहिरी दावे के बावजूद शैतान के बहकावे में आ गए।

सच्चा ईमान और इख़्लास ही वह मज़बूत ढाल है जो इंसान को इब्लीस के हर वार से बचाती है।

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