Transliteration: (Qulid 'ul lazeena za'amtum min doonil laahi laa yamlikoona misqaala zarratin fissamaawaati wa laa fil ardi wa maa lahum feehimaa min shirkinw wa maa lahoo minhum min zaheer)
"आप कह दीजिए: 'पुकारो उन्हें जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा गुमान करते हो [73]। वे न आसमानों में और न ज़मीन में ज़र्रा बराबर किसी चीज़ के मालिक हैं [74], और न इन दोनों में उनकी कोई शिरकत है [75], और न उनमें से कोई अल्लाह का मददगार है [76]।'"
हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को हुक्म दिया गया कि मुशरिकीन को सख़्त और आजिज़ करने वाला चैलेंज दें कि मुसीबत के वक़्त अपने इन झूठे माबूदों को पुकार कर देख लो। यह साबित करता है कि बे-जान बुत और बातिल हस्तियां किसी की पुकार सुनने और नफ़ा-नुक्सान पहुँचाने की कोई ताक़त नहीं रखतीं। यह चैलेंज उनके शिर्क के बुतलान की खुली दलील है।
आसमान व ज़मीन के किसी एक ज़र्रे के भी ये बातिल माबूद मालिक नहीं हैं। हक़ीक़ी ज़ाती मिल्कियत सिर्फ़ अल्लाह की है। हाँ, अल्लाह तआला अपने अंबिया और औलिया को अपने इज़्न व अता से तसर्रुफ़ात और नेमतें अता फ़रमाता है (जैसे हज़रत ईसा को परिंदा बनाने और हुज़ूर ﷺ को कौसर अता फ़रमाने का इख़्तियार), मगर बे-जान बुतों को अल्लाह की तरफ़ से कोई अता हासिल नहीं।
बुत और माबूदाने बातिला अल्लाह के साथ ख़ालिक़, मालिक या निज़ामे कायनात चलाने में ज़रा बराबर भी शरीक नहीं हैं। यह आयत तौहीद के अक़ीदे को पुख़्ता करती है और हर क़िस्म की शिर्कियत की जड़ों को काट देती है।
अल्लाह तआला को अपनी बादशाही में किसी मददगार या वज़ीर की हाजत नहीं है। और न ही ये बुत क़यामत में किसी की मदद कर सकेंगे, बल्कि वे अपने पुजारियों से बे-ज़ारी का इज़हार करेंगे। साबित हुआ कि हक़ीक़ी शफ़ाअत सिर्फ़ अल्लाह के इज़्न से और उसके महबूब बंदों के ज़रिये ही मुमकिन होगी।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat