कुरान - 34:25 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
قُل لَّا تُسۡـَٔلُونَ عَمَّآ أَجۡرَمۡنَا وَلَا نُسۡـَٔلُ عَمَّا تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Qul laa tus'aloona 'ammaaa ajramnaa wa laa nus'alu 'ammaa ta'maloon)

आप कह दीजिए, "न तुमसे हमारे गुनाहों के बारे में पूछा जाएगा [84] और न हमसे तुम्हारे आमाल के बारे में बाज़पुर्स होगी [85]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 25

"आप कह दीजिए: 'न तुमसे हमारे गुनाहों के बारे में पूछा जाएगा [84] और न हमसे तुम्हारे आमाल के बारे में बाज़पुर्स होगी [85]।'"

[84] इन्फ़िरादी जवाबदेही और इस्मत-ए-अंबिया

यह ऐलान इस बात को वाज़ेह करता है कि आख़िरत में हर एक की अलग जवाबदेही होगी। काफ़िरों के इस गुमान पर कि मुसलमान ग़लती पर हैं, फ़रमाया गया कि अगर बिलफ़र्ज़ ऐसा होता तो उसका हिसाब तुमसे न मांगा जाता। इसका यह मतलब हरगिज़ नहीं कि नबी या मोमिनीन से कोई गुनाह हुआ, बल्कि यह मुबलिग़ाना अंदाज़ में काफ़िरों की दलील का इलज़ामी जवाब है, जबकि अंबिया-ए-किराम मासूम और गुनाहों से पाक होते हैं।

[85] तब्लीग़े रिसालत का फ़रीज़ा और काफ़िरों की ज़िम्मेदारी

रसूलुल्लाह ﷺ ने हक़ का पैग़ाम पूरी तरह पहुँचा दिया। अब अगर काफ़िर कुफ़्र और नाफ़रमानी पर क़ायम रहते हैं, तो उसकी सज़ा का बोझ ख़ुद उन पर होगा; नबी से उनके कुफ़्र की बाज़पुर्स नहीं होगी। यह आयत मुनकिरीन के लिए आख़िरी तंबीह है कि वे अपने अंजाम की ख़ुद फ़िक्र करें।

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