कुरान - 34:27 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
قُلۡ أَرُونِيَ ٱلَّذِينَ أَلۡحَقۡتُم بِهِۦ شُرَكَآءَۖ كَلَّاۚ بَلۡ هُوَ ٱللَّهُ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Qul arooniyal lazeena alhaqtum bihee shurakaaa'a kallaa; bal Huwal Laahul 'Azeezul Hakeem)

आप कह दीजिए, "मुझे वे दिखाओ [88] जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ शरीक बनाकर मिला रखा है [89]; हरगिज़ नहीं! बल्कि वही अल्लाह है जो ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 27

"आप कह दीजिए: 'मुझे वे दिखाओ [88] जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ शरीक बनाकर मिला रखा है [89]। हरगिज़ नहीं! बल्कि वही अल्लाह है जो ज़बरदस्त, बड़ी हिकमत वाला है।'"

[88] माबूदाने बातिला की दलील का मुतालबा

"मुझे दिखाओ" का मफ़हूम यह है कि अपने इन बुतों की ख़ुदाई पर कोई दलील या सनद पेश करो। यह महज़ ज़ाहिरी देखना नहीं, बल्कि मुशरिकीन को ला-जवाब और शर्मिंदा करने के लिए उनकी बे-बुनियाद दलीलों का मुतालबा है।

[89] शिर्क का बुतलान और अज़ीज़ व हकीम ख़ुदा

काफ़िर अपने झूठे माबूदों के हक़ में कोई दलील पेश करने से क़ासिर हैं। अल्लाह तआला हर क़िस्म के शरीक से पाक है; वही 'अल-अज़ीज़' (सब पर ग़ालिब) और 'अल-हकीम' (हिकमत वाला) है जिसकी सल्तनत में किसी की शिरकत का कोई तसव्वुर नहीं।

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