Transliteration: (Qul yajma'u bainanaa Rabbunaa summa yaftahu bainanaa bilhaqq; wa Huwal Fattaahul 'Aleem)
"आप कह दीजिए: 'हमारा रब हम सबको जमा करेगा। फिर हमारे दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमाएगा [86]; और वही सबसे बड़ा फ़ैसला करने वाला, सब कुछ जानने वाला है [87]।'"
क़यामत के दिन अल्लाह तआला अव्वलीन व आख़िरीन तमाम इंसानों को एक मैदान में जमा फ़रमाएगा। उसके बाद हक़ और बातिल के दरमियान अमली जुदाई कर दी जाएगी और मुजरिमों से फ़रमाया जाएगा: "ऐ मुजरिमो! आज अलग हो जाओ" (सूरह यासीन: 59)। यह फ़ैसला दुनिया में दी गई वह्य और सदाक़त की अमली तस्दीक़ होगा।
दुनियावी मुंसिफ़ इल्म की कमी या ज़ाहिरी गवाहियों की बिना पर ग़लती कर सकते हैं, मगर अल्लाह तआला 'अल-फ़त्ताह' (कामिल इंसाफ़ से फ़ैसला करने वाला) और 'अल-अलीम' (दिलों के भेदों को जानने वाला) है। उसका फ़ैसला हर तरह की ख़ता से पाक, अटल और मुकम्मल इंसाफ़ पर मबनी होगा। अहले ईमान के लिए यह तसल्ली की बात है और काफ़िरों के लिए सख़्त चेतावनी।
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