कुरान - 34:28 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ إِلَّا كَآفَّةٗ لِّلنَّاسِ بَشِيرٗا وَنَذِيرٗا وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ

और (ऐ हबीब!) हमने आपको नहीं भेजा [90] मगर तमाम इंसानों के लिए [91] बशारत देने वाला और डर सुनाने वाला बनाकर, लेकिन अक्सर लोग (इस हक़ीक़त को) नहीं जानते [92]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 28

"और (ऐ महबूब!) हमने आपको नहीं भेजा [90] मगर तमाम इंसानों के लिए [91] बशारत देने वाला और डर सुनाने वाला बनाकर, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [92]।"

[90] हुज़ूर ﷺ की बे-मिसाल और मुनफ़रिद बेअसत

दीगर इंसान दुनिया में महज़ अपनी ज़िंदगी गुज़ारने आते हैं, मगर हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ को अल्लाह ने एक अज़ीम आलमी मक़सद और रिसालत के साथ मब्ऊष फ़रमाया है। आपका हर लम्हा और हर अमल इताअत और रहनुमाई का नूर है।

[91] आलमगीर रिसालत — 'काफ़्फ़तल-लिन्नास'

यह आयत रसूलुल्लाह ﷺ की आलमगीर (Universal) रिसालत की रौशन सनद है। पिछले अंबिया किसी मख़सूस क़ौम, ख़ास ज़माने या इलाक़े के लिए आते थे, मगर हुज़ूर ﷺ को कयामत तक के तमाम इंसानों और जिन्नों के लिए रसूल बनाकर भेजा गया। आप अहले ईमान के लिए जन्नत की बशारत देने वाले (बशीर) और नाफ़रमानों को अज़ाब से डराने वाले (नज़ीर) हैं।

[92] अक्सर लोगों की जिहालत व ग़फ़लत

अफ़सोस कि अक्सर लोग अपनी जिहालत या हठधर्मी की वजह से हुज़ूर ﷺ के इस अज़ीम मर्तबे और आलमगीर रिसालत को नहीं पहचानते और महरूमे क़िस्मत रहते हैं।

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