"और (ऐ महबूब!) हमने आपको नहीं भेजा [90] मगर तमाम इंसानों के लिए [91] बशारत देने वाला और डर सुनाने वाला बनाकर, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते [92]।"
दीगर इंसान दुनिया में महज़ अपनी ज़िंदगी गुज़ारने आते हैं, मगर हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ को अल्लाह ने एक अज़ीम आलमी मक़सद और रिसालत के साथ मब्ऊष फ़रमाया है। आपका हर लम्हा और हर अमल इताअत और रहनुमाई का नूर है।
यह आयत रसूलुल्लाह ﷺ की आलमगीर (Universal) रिसालत की रौशन सनद है। पिछले अंबिया किसी मख़सूस क़ौम, ख़ास ज़माने या इलाक़े के लिए आते थे, मगर हुज़ूर ﷺ को कयामत तक के तमाम इंसानों और जिन्नों के लिए रसूल बनाकर भेजा गया। आप अहले ईमान के लिए जन्नत की बशारत देने वाले (बशीर) और नाफ़रमानों को अज़ाब से डराने वाले (नज़ीर) हैं।
अफ़सोस कि अक्सर लोग अपनी जिहालत या हठधर्मी की वजह से हुज़ूर ﷺ के इस अज़ीम मर्तबे और आलमगीर रिसालत को नहीं पहचानते और महरूमे क़िस्मत रहते हैं।
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