कुरान - 34:30 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قُل لَّكُم مِّيعَادُ يَوۡمٖ لَّا تَسۡتَـٔۡخِرُونَ عَنۡهُ سَاعَةٗ وَلَا تَسۡتَقۡدِمُونَ

Transliteration: (Qul lakum mee'aadu Yawmil laa tasta'khiroona 'anhu saa'atanw wa laa tastaqdimoon (section 3))

आप कह दीजिए, "तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन का वादा मुक़र्रर है जिससे न तुम एक घड़ी पीछे हट सकोगे और न उससे आगे बढ़ सकोगे [94]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 30

"आप कह दीजिए: 'तुम्हारे लिए एक ऐसे दिन का वादा मुक़र्रर है जिससे न तुम एक घड़ी पीछे हट सकोगे और न उससे आगे बढ़ सकोगे [94]!'"

[94] मौत और क़यामत के मुअय्यन वक़्त का यक़ीन

यह आयत मुअय्यन दिन यानी क़यामत या मौत के दिन के यक़ीनी आने का ऐलान फ़रमाती है। अल्लाह तआला के यहाँ हर इंसान की मौत और पूरी कायनात के ख़ात्मे का वक़्त अज़ल से मुक़र्रर और तय है। जब वह घड़ी आ पहुंचेगी, तो कोई इंसान अपनी तदबीर, ताक़त या हीले से एक लम्हा भी आगे या पीछे नहीं हो सकेगा।

ज़िंदगी और मौत का इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह तआला के हाथ में है। हाँ, अल्लाह अपने बरगुज़ीदा बंदों की दुआ से कभी उम्र में बरकत अता फ़रमाता है, जैसा कि हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की दुआ से हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की उम्र में इज़ाफ़ा फ़रमाया गया था। मगर जब मुअय्यन वक़्त आ जाए, तो कोई मख़लूक़ उससे बच नहीं सकती। यह आयत मुनकिरीन के तकब्बुर को तोड़ती है कि वे अपने अंजाम से किसी तरह फ़रार हासिल नहीं कर सकते।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now