कुरान - 34:32 सूरह सबअ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
قَالَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَكۡبَرُواْ لِلَّذِينَ ٱسۡتُضۡعِفُوٓاْ أَنَحۡنُ صَدَدۡنَٰكُمۡ عَنِ ٱلۡهُدَىٰ بَعۡدَ إِذۡ جَآءَكُمۖ بَلۡ كُنتُم مُّجۡرِمِينَ

Transliteration: (Qaalal lazeenas takbaroo lillazeenas tud'ifooo anahnu sadadnaakum 'anil hudaa ba'da iz jaaa'akum bal kuntum mujrimeen)

वे जो बड़े बनते थे उन कमज़ोर समझे जाने वालों से कहेंगे, "क्या हमने तुम्हें हिदायत से रोका था [99] इसके बाद कि वह तुम्हारे पास आ चुकी थी? नहीं, बल्कि तुम ख़ुद ही मुजरिम थे [100]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह सबअ आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह सबा तफ़सीर - आयत 32

"वे जो बड़े बनते थे उन कमज़ोर समझे जाने वालों से कहेंगे: 'क्या हमने तुम्हें हिदायत से रोका था [99] इसके बाद कि वह तुम्हारे पास आ चुकी थी? नहीं, बल्कि तुम ख़ुद ही मुजरिम थे [100]!'"

[99] सरदारों का ज़िम्मेदारी से साफ़ मुकरना

क़यामत के दिन मुतकब्बिर सरदार अपने पैरोकारों की बात सुनकर साफ़ मुकर जाएंगे और कहेंगे कि हमने तुम पर कोई ज़बरदस्ती नहीं की थी। हिदायत की दलीलें तुम्हारे सामने रोशन थीं, मगर तुमने अपनी मर्ज़ी से कुफ़्र चुना। इससे साबित होता है कि दुनियावी ग़लत तअल्लुक़ात और बातिल दोस्ती आख़िरत में दुश्मनी में बदल जाएगी; सिर्फ़ अल्लाह के लिए की गई मोहब्बत ही क़ायम रहेगी।

[100] अवाम और सरदारों का मुश्तरका जुर्म

लीडर कहेंगे कि तुम ख़ुद ही मुजरिम और गुनाहगार थे। हर इंसान अपने अक़ीदे और आमाल का ख़ुद ज़िम्मेदार है; कोई किसी दूसरे के सर पर अपना जुर्म डालकर बच नहीं सकता। याद रहे कि यह मुकालमा काफ़िरों और उनके मुशरिक सरदारों के दरमियान है, इसे अहले हक़ उलमा व औलिया-ए-किराम की तालीमात पर क़ियास नहीं किया जा सकता।

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