कुरान - 12:42 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَقَالَ لِلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُۥ نَاجٖ مِّنۡهُمَا ٱذۡكُرۡنِي عِندَ رَبِّكَ فَأَنسَىٰهُ ٱلشَّيۡطَٰنُ ذِكۡرَ رَبِّهِۦ فَلَبِثَ فِي ٱلسِّجۡنِ بِضۡعَ سِنِينَ

Transliteration: (Wa qaala lillazee zanna annahoo najim minhumaz kurnee 'inda rabbika fa-ansaahush Shaitaanu zikra Rabbihee falabisa fis sijni bid'a sineen)

और यूसुफ़ ने उस व्यक्ति से, जिसके बारे में समझा कि वह बच जाएगा, कहा, "अपने स्वामी (राजा) के सामने मेरा ज़िक्र करना;" लेकिन शैतान ने उसे अपने स्वामी के सामने ज़िक्र करना भुला दिया, अतः यूसुफ़ कई साल (सात या नौ साल) और क़ैदखाने में ही रहे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 42 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सांसारिक साधन और क़ैद में वर्षों का सब्र

हज़रत यूसुफ़ ने साक़ी से अपनी बेगुनाही का ज़िक्र राजा से करने को कहा ताकि इंसाफ़ हो सके। लेकिन रिहा होते ही साक़ी शाही ठाठ-बाट में भूल गया। अल्लाह की हिकमत यह थी कि यूसुफ़ अभी कुछ साल और जेल में सब्र करें ताकि जब उनकी रिहाई हो तो वह पूरे मिस्र के तख़्त और सर्वोच्च सम्मान के साथ हो।

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