Transliteration: (Innaneee Anal laahu laaa ilaaha illaa Ana fa'budnee wa aqimis-salaata lizikree)
" 'बेशक मैं ही अल्लाह हूँ! मेरे सिवा कोई माबूद नहीं; पस मेरी ही इबादत कीजिए और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कीजिए [15]।' "
इस आयत से अहम तालीमात हासिल होती हैं:
ईमान के बाद सबसे बड़ा फ़र्ज़ नमाज़ है।
नमाज़ सिर्फ़ अल्लाह की याद और रज़ा के लिए पढ़ी जाए, रियाकारी (दिखावे) के लिए नहीं।
अल्लाह तआला नमाज़ पढ़ने वाले को याद फ़रमाता है, क्योंकि आयत का मफ़हूम यह भी है: "तुम नमाज़ में मुझे याद करो, मैं अपनी रहमत से तुम्हें याद करूंगा।"
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