कुरान - 20:14 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
إِنَّنِيٓ أَنَا ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱعۡبُدۡنِي وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ لِذِكۡرِيٓ

Transliteration: (Innaneee Anal laahu laaa ilaaha illaa Ana fa'budnee wa aqimis-salaata lizikree)

14. 'बेशक मैं ही अल्लाह हूँ! मेरे सिवा कोई माबूद नहीं; पस मेरी ही इबादत कीजिए और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कीजिए [15]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 14 की तफ़सीर

" 'बेशक मैं ही अल्लाह हूँ! मेरे सिवा कोई माबूद नहीं; पस मेरी ही इबादत कीजिए और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कीजिए [15]।' "

[15] नमाज़ — याद-ए-इलाही का सबसे बड़ा ज़रिया

इस आयत से अहम तालीमात हासिल होती हैं:

  1. ईमान के बाद सबसे बड़ा फ़र्ज़ नमाज़ है।

  2. नमाज़ सिर्फ़ अल्लाह की याद और रज़ा के लिए पढ़ी जाए, रियाकारी (दिखावे) के लिए नहीं।

  3. अल्लाह तआला नमाज़ पढ़ने वाले को याद फ़रमाता है, क्योंकि आयत का मफ़हूम यह भी है: "तुम नमाज़ में मुझे याद करो, मैं अपनी रहमत से तुम्हें याद करूंगा।"

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