कुरान - 20:16 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنۡهَا مَن لَّا يُؤۡمِنُ بِهَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ فَتَرۡدَىٰ

Transliteration: (Falaa yasuddannaka 'anhaa mal laa yu'minu bihaa wattaba'a hawaahu fatardaa)

16. तो ऐसा न हो कि कोई शख़्स जो इस पर ईमान नहीं रखता और अपनी ख़्वाहिश के पीछे पड़ा है, तुम्हें इस पर ईमान लाने से रोक दे [17] और तुम हलाक हो जाओ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 16 की तफ़सीर

"तो ऐसा न हो कि कोई शख़्स जो इस पर ईमान नहीं रखता और अपनी ख़्वाहिश के पीछे पड़ा है, तुम्हें इस पर ईमान लाने से रोक दे [17] और तुम हलाक हो जाओ।"

[17] मुनकिरीन की पैरवी से परहेज़ और सबात-ए-क़दम

इसका मफ़हूम यह है कि: ऐ मोमिन! तुम हरगिज़ उस काफ़िर व मुनकिर की बात न सुनो जो क़ियामत के दिन का इन्कार करता है।

किसी ऐसे शख़्स को, जो अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिशात की पैरवी करता है, यह मौक़ा न दो कि वह तुम्हें हक़ और आख़िरत की सच्चाई में शक में डाल दे या उससे फेर दे।

अगर तुमने उनकी पैरवी की, तो तुम भी हलाक व तबाह हो जाओगे।

यह आयत उन लोगों के असर से बचने की वाज़ेह चेतावनी और नसीहत है जो बिना जवाबदेही और आख़िरत के ख़ौफ़ के ज़िंदगी गुज़ारते हैं, और अहले ईमान को दीन पर साबित-क़दम रहने की ताकीद करती है।

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