कुरान - 20:5 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
ٱلرَّحۡمَٰنُ عَلَى ٱلۡعَرۡشِ ٱسۡتَوَىٰ

Transliteration: (Ar-Rahmaanu 'alal 'Arshis tawaa)

5. वह निहायत मेहरबान (रहमान) जो अर्श पर मुस्तवी [6] (अपनी शान के मुताबिक़ जलवा-अफ़रोज़) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 5 की तफ़सीर

"वह निहायत मेहरबान (रहमान) जो अर्श पर मुस्तवी [6] (अपनी शान के मुताबिक़ जलवा-अफ़रोज़) है।"

[6] इस्तवा अलल अर्श — इंसानी तशबीह से पाक

लफ़्ज़ 'अर्श' बादशाह के तख़्त को कहते हैं, और 'इस्तवा' के माना क़ायम होने या जलवागर होने के हैं। लेकिन अल्लाह तआला हर क़िस्म के जिस्म, मक़ाम और हुदूद से पाक व मुनज़्ज़ह है।

यह आयत मुतशाबिहात में से है। यहाँ जो इस्तवा मुराद है, वह अल्लाह की शान और किबरियाई के लायक़ है—इंसानों की तरह बैठने या जगह घेरने जैसा हरगिज़ नहीं।

यह अल्लाह तआला की मुतलक़ हुकूमत और शाही इक़्तिदार का बयान है, बिना इसके कि अल्लाह के लिए कोई जिस्मानी सिफ़त साबित की जाए।

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