Transliteration: (Illaa tazkiratal limany yakhshaa)
"बल्कि सिर्फ़ उस शख़्स के लिए नसीहत बनाकर जो (अल्लाह से) डरता है [4]।"
क्योंकि सिर्फ़ यही लोग क़ुरआन से फ़ायदा उठाते हैं। वरना अपनी ज़ात के एतबार से क़ुरआन मजीद तमाम इंसानों के लिए हिदायत व नसीहत है।
यह आयत वाज़ेह करती है कि अगरचे क़ुरआन का पैग़ाम सार्वभौमिक (सबके लिए) है, लेकिन इसका हक़ीक़ी असर उन्हीं दिलों पर होता है जिनमें अल्लाह का ख़ौफ़, आजिज़ी और हक़ को क़बूल करने की तड़प मौजूद हो।
लिहाज़ा मुनकिरीन और मुख़ालिफ़ीन के एतराज़ात बेबुनियाद हैं, क्योंकि क़ुरआन खुद फ़रमाता है कि इसका नफ़ा सिर्फ़ उन्हीं को मिलता है जो खुलूस के साथ इसकी तरफ़ रुजू करते हैं।
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