कुरान - 20:3 सूरह ता-हा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
إِلَّا تَذۡكِرَةٗ لِّمَن يَخۡشَىٰ

Transliteration: (Illaa tazkiratal limany yakhshaa)

3. बल्कि सिर्फ़ उस शख़्स के लिए नसीहत बनाकर जो (अल्लाह से) डरता है [4] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ता-हा आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ता-हा — आयत 3 की तफ़सीर

"बल्कि सिर्फ़ उस शख़्स के लिए नसीहत बनाकर जो (अल्लाह से) डरता है [4]।"

[4] ख़ौफ़े ख़ुदा रखने वालों के लिए हिदायत

क्योंकि सिर्फ़ यही लोग क़ुरआन से फ़ायदा उठाते हैं। वरना अपनी ज़ात के एतबार से क़ुरआन मजीद तमाम इंसानों के लिए हिदायत व नसीहत है।

यह आयत वाज़ेह करती है कि अगरचे क़ुरआन का पैग़ाम सार्वभौमिक (सबके लिए) है, लेकिन इसका हक़ीक़ी असर उन्हीं दिलों पर होता है जिनमें अल्लाह का ख़ौफ़, आजिज़ी और हक़ को क़बूल करने की तड़प मौजूद हो।

लिहाज़ा मुनकिरीन और मुख़ालिफ़ीन के एतराज़ात बेबुनियाद हैं, क्योंकि क़ुरआन खुद फ़रमाता है कि इसका नफ़ा सिर्फ़ उन्हीं को मिलता है जो खुलूस के साथ इसकी तरफ़ रुजू करते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now