कुरान - 10:54 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
وَلَوۡ أَنَّ لِكُلِّ نَفۡسٖ ظَلَمَتۡ مَا فِي ٱلۡأَرۡضِ لَٱفۡتَدَتۡ بِهِۦۗ وَأَسَرُّواْ ٱلنَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَۖ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡقِسۡطِ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa law anna likulli nafsin zalamat maa fil ardi laftadat bih; wa asarrun nadaamata lammaa ra awul 'azaab, wa qudiya bainahum bilqist; wa hum laa yuzlamoon)

और यदि हर उस व्यक्ति के पास जिसने ज़ुल्म किया था, वह सब कुछ हो जो ज़मीन में है, तो वह (अज़ाब से बचने के लिए) उसे फ़िद्ये (मुआवज़े) में दे डाले; और जब वे अज़ाब को देखेंगे तो अपने दिलों में पछतावे को छुपाएंगे; और उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला किया जाएगा और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 54 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़यामत के दिन फ़िद्ये की व्यर्थता

उस दिन सारी दुनिया की दौलत और ख़ज़ाने भी किसी काफ़िर को सज़ा से नहीं बचा सकेंगे। अज़ाब की भयानकता देखकर उनके होश उड़ जाएंगे और वे शर्मिंदगी व पछतावे से अपनी नज़रें झुका लेंगे।

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