कुरान - 10:57 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَتۡكُم مَّوۡعِظَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡ وَشِفَآءٞ لِّمَا فِي ٱلصُّدُورِ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhan naasu qad jaaa'atkum maw'izatun mir Rabbikum wa shifaaa'ul limaa fis sudoori wa hudanw wa rahmatul lil mu'mineen)

ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक नसीहत आ गई है और उन (रोगों) के लिए शिफ़ा (आरोग्य) जो सीनों (दिलों) में हैं, और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 57 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] क़ुरआन की चार महान विशेषताएं

क़ुरआन मजीद को इस आयत में चार उपाधियों से सुशोभित किया गया है:
1. मौइज़ह (नसीहत): अच्छाई की प्रेरणा और बुराई से रोकने वाली उत्तम सीख।
2. शिफ़ा (रोगमुक्ति): दिलों की आध्यात्मिक बीमारियों—जैसे शिर्क, निफ़ाक़, शक, अहंकार, ईर्ष्या और लालच—की अचूक दवा।
3. हिदायत (मार्गदर्शन): जीवन के हर मोड़ पर सीधा और सुरक्षित रास्ता दिखाने वाला प्रकाश।
4. रहमत (दया): ईमान लाने वालों के लिए दोनों जहानों में अल्लाह की विशेष कृपा और शांति का साधन।

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