कुरान - 10:58 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
قُلۡ بِفَضۡلِ ٱللَّهِ وَبِرَحۡمَتِهِۦ فَبِذَٰلِكَ فَلۡيَفۡرَحُواْ هُوَ خَيۡرٞ مِّمَّا يَجۡمَعُونَ

Transliteration: (Qul bi fadlil laahi wa bi rahmatihee fa bi zaalika fal yafrahoo huwa khairun mimmaa yajma'oon)

कह दीजिए, "यह अल्लाह के फ़ज़ल (अनुग्रह) और उसकी रहमत (कृपा) से है; अतः इस पर तो उन्हें खुश होना चाहिए। यह उससे कहीं बेहतर है जो कुछ वे (धन-दौलत) जमा करते हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 58 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह के फ़ज़ल और रहमत पर खुशी मनाना

हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) के अनुसार 'फ़ज़ल' से मुराद क़ुरआन मजीद है और 'रहमत' से मुराद इस्लाम और हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ हैं। दुनिया का माल-दौलत यहीं छूट जाने वाला है, जबकि क़ुरआन और ईमान की दौलत हमेशा रहने वाली और जन्नत में ले जाने वाली है। इसलिए मोमिन का सबसे बड़ा हर्ष और गर्व उसका दीन और ईमान होना चाहिए।

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