Transliteration: (Qul bi fadlil laahi wa bi rahmatihee fa bi zaalika fal yafrahoo huwa khairun mimmaa yajma'oon)
हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) के अनुसार 'फ़ज़ल' से मुराद क़ुरआन मजीद है और 'रहमत' से मुराद इस्लाम और हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ हैं। दुनिया का माल-दौलत यहीं छूट जाने वाला है, जबकि क़ुरआन और ईमान की दौलत हमेशा रहने वाली और जन्नत में ले जाने वाली है। इसलिए मोमिन का सबसे बड़ा हर्ष और गर्व उसका दीन और ईमान होना चाहिए।
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