कुरान - 10:59 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
قُلۡ أَرَءَيۡتُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ لَكُم مِّن رِّزۡقٖ فَجَعَلۡتُم مِّنۡهُ حَرَامٗا وَحَلَٰلٗا قُلۡ ءَآللَّهُ أَذِنَ لَكُمۡۖ أَمۡ عَلَى ٱللَّهِ تَفۡتَرُونَ

Transliteration: (Qul ara'aitum maaa anzalal laahu lakum mir rizqin faja'altum minhu haraamanw wa halaalan qul aaallaahu azina lakum; am 'alal laahi taftaroon)

कह दीजिए, "क्या तुमने देखा कि जो रोज़ी अल्लाह ने तुम्हारे लिए उतारी, फिर तुमने उसमें से किसी को हराम और किसी को हलाल बना लिया?" पूछिए, "क्या अल्लाह ने तुम्हें इसकी अनुमति दी है, या तुम अल्लाह पर झूठ गढ़ रहे हो?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 59 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हलाल और हराम तय करने का ईश्वरीय अधिकार

ज़माने-ए-जाहिलियत में मुशरिक अपनी मनमर्जी से कुछ जानवरों और फसलों को बुतों के नाम पर अपने लिए हराम या किसी विशेष वर्ग के लिए ख़ास कर लेते थे (जैसे बहीरा, साइबा आदि)। अल्लाह ने फ़रमाया कि किसी चीज़ को हलाल या हराम ठहराने का अधिकार केवल क़ानून-साज़ (अल्लाह) को है; अपनी तरफ़ से पाबंदियां लगाना अल्लाह पर झूठा आरोप लगाने के समान है।

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