कुरान - 10:60 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَمَا ظَنُّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Wa maa zannul lazeena yaftaroona 'alal laahil kaziba Yawmal Qiyaamah; innal laaha lazoo fadlin 'alan naasi wa laakinna aksarahum laa yashkuroon)

और जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, क़यामत के दिन के बारे में उनका क्या ख़्याल है? निस्संदेह, अल्लाह लोगों पर बड़ा अनुग्रह (फ़ज़ल) करने वाला है, लेकिन उनमें से अधिकतर लोग शुक्र नहीं करते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 60 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] झूठे धार्मिक दावेदारों के लिए चेतावनी

धर्म के नाम पर झूठ बोलने वालों को सोचना चाहिए कि क़यामत के दिन जब अल्लाह के सामने हिसाब होगा, तो वे किस मुंह से जवाब देंगे? अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि वह तुरंत अज़ाब नहीं भेजता बल्कि तौबा की मुहलत देता है, फिर भी अधिकांश लोग नाशुकरे बने रहते हैं।

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