कुरान - 10:61 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَمَا تَكُونُ فِي شَأۡنٖ وَمَا تَتۡلُواْ مِنۡهُ مِن قُرۡءَانٖ وَلَا تَعۡمَلُونَ مِنۡ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيۡكُمۡ شُهُودًا إِذۡ تُفِيضُونَ فِيهِۚ وَمَا يَعۡزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثۡقَالِ ذَرَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِ وَلَآ أَصۡغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَآ أَكۡبَرَ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٍ

Transliteration: (Wa maa takoonu fee sha'ninw wa maa tatloo minhu min qur'aaninw wa laa ta'maloona min 'amalin illaa kunnaa 'alaikum shuhoodan iz tufeedoona feeh; wa maa ya'zubu 'ar Rabbika min misqaali zarratin fil ardi wa laa fis samaaa'i wa laaa asghara min zaalika wa laaa akbara illaa fee Kitaabin Mubeen)

और आप किसी भी स्थिति (काम) में हों, और क़ुरआन में से जो कुछ भी पढ़कर सुनाते हों, और (ऐ लोगो!) तुम जो भी अमल करते हो, हम तुम पर गवाह होते हैं जब तुम उसमें प्रवृत्त होते हो। और आपके रब से ज़मीन में और न आसमान में एक ज़र्रे (कण) के बराबर भी कोई चीज़ छुपी नहीं है; और न उससे कोई छोटी चीज़ और न कोई बड़ी चीज़, मगर वह एक स्पष्ट किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में दर्ज है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 61 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह का सर्वव्यापी ज्ञान (इल्म-ए-मुहीत)

यह आयत इंसान के दिल में 'मुराक़बा' और 'एहसान' की भावना पैदा करती है। इंसान अकेले में हो या महफ़िल में, जो बात भी सोचता या करता है, अल्लाह तआला उसे सीधे देख रहा होता है। ब्रह्मांड के सबसे सूक्ष्म कण से लेकर आकाशगंगाओं तक हर चीज़ लौह-ए-महफ़ूज़ में सुरक्षित दर्ज है।

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