कुरान - 33:3 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلٗا

Transliteration: (Wa tawakkal 'alal laah; wa kafaa billaahi Wakeelaa)

और (ऐ महबूब नबी!) अल्लाह पर भरोसा रखिए; और अल्लाह कारसाज़ के तौर पर काफ़ी है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 3

"और (ऐ महबूब नबी!) अल्लाह पर भरोसा रखिए; और अल्लाह कारसाज़ के तौर पर काफ़ी है।"

अल्लाह पर कामिल तवक्कुल

इस आयत-ए-करीमा में हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ और आपके वसीले से तमाम अहले ईमान को तालीम दी गई है कि अपने तमाम मामलात को अल्लाह तआला के सुपुर्द फ़रमा दें और उसी ज़ात-ए-अक़दस पर कामिल भरोसा रखें। दुश्मनों की साज़िशों, मुख़ालिफ़त और दुनियावी मुश्किलात के मुक़ाबले में सिर्फ़ अल्लाह तआला की नुसरत पर यक़ीन रखना ही ईमान की हक़ीक़त है, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के हर काम को संवारने, उनकी हिफ़ाज़त फ़रमाने और बेहतरीन कारसाज़ी के लिए अकेला ही काफ़ी है।

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