Transliteration: (Wazkurna maa yutlaa fee bu yootikunna min aayaatil laahi wal Hikmah; innal laaha kaana lateefan Khabeera (section 4))
"और तुम्हारे घरों में अल्लाह की जो आयात और हिकमत [89] पढ़ी जाती हैं उन्हें याद रखो। बेशक अल्लाह बारीक-बीन, पूरी ख़बर रखने वाला है।"
यह आयत हुज़ूर ﷺ की पाकीज़ा बीवियों को याद दिलाती है कि उनके हुजरे वह्ये इलाही के मरकज़ हैं—वे मुक़द्दस मक़ामात जहाँ से क़ुरआन का नूर और हदीस की हिकमत फूटती है। क़ुरआन-ए-मजीद को अल्लाह की आयात फ़रमाया गया, और हदीस शरीफ़ को उसकी हिकमत।
चूंकि उनके घरों में रोज़ाना क़ुरआन और सुन्नत की तिलावत, तालीम और अमली नफ़ाज़ होता था, इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे तक़वे, हया और इताअत में बे-मिसाल नमूना बनें और नेकी में तमाम औरतों से आगे रहें।
हक़ीक़त यह है कि हुज़ूर ﷺ के हुजरे इस्लामी इल्म और रूहानियत की पहली दरसगाहें थे, चुनांचे उम्महातुल मुअमिनीन को इस मुक़द्दस इल्म की हिफ़ाज़त, तफ़क्कुर और तब्लीग़ की अज़ीम ज़िम्मेदारी सौंपी गई।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat