कुरान - 96:3 सूरह अल-अलाक़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
ٱقۡرَأۡ وَرَبُّكَ ٱلۡأَكۡرَمُ

Transliteration: (Iqra wa rab bukal akram )

3. पढ़ें [5], और आपका रब सबसे ज़्यादा करीम [6] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अलाक़ आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

पढ़ें, क्योंकि आपका रब सबसे बड़ा कृपालु है (Read, for Your Lord is the Most Generous) सूरह अल-अलक़, 96:3

 

आयत की व्याख्या (Verse Breakdown)

पढ़ें [5] (Read)

पढ़ने के हुक्म को दोहराने की वजहें:

  1. ज़ोर देना (Emphasis): तिलावत (recitation) की अहमियत को रेखांकित करने के लिए।
  2. अलग-अलग संदर्भ (Different Contexts): पहली तिलावत नमाज़ में पढ़ने के लिए हो सकती है, और दूसरी इसके बाहर।
  3. दोहरा उद्देश्य (Dual Purpose): एक तिलावत खुद के लिए सवाब और दूसरी उम्मत को सिखाने के लिए हो सकती है।
  4. फ्रीक्वेंसी (Frequency): पहली का मतलब कभी-कभी पढ़ना, दूसरी का मतलब नियमित रूप से पढ़ना।

पैग़ंबर ﷺ की तिलावत का खास मक़ाम (The Unique Recitation of the Prophet ﷺ):

  • हमारी तिलावत सिर्फ सवाब हासिल करने के लिए होती है।
  • पैग़ंबर ﷺ की तिलावत सवाब के साथ उम्मत को राह दिखाने और सिखाने का जरिया भी थी।
  • उदाहरण (Analogy): जैसे जहाज का कप्तान सभी मुसाफिरों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है, वैसे ही पैग़ंबर ﷺ उम्मत को सही राह पर ले जाते हैं।

क्योंकि आपका रब सबसे बड़ा कृपालु है [6] (For Your Lord is the Most Generous)

अल्लाह की असीम कृपा (Infinite Generosity):

  • अल्लाह की कृपा स्वार्थ रहित और असीमित है।
  • हर नेमत (bounty) अल्लाह की मरज़ी और हुक्म से बिना भेदभाव के मिलती है।

इंसानी और इलाही कृपा का अंतर (Difference Between Human and Divine Generosity):

  • इंसानी दरियादिली अल्लाह की दी हुई तौफ़ीक़ पर निर्भर है।
  • अल्लाह की कृपा हर मख़लूक़ पर बिना किसी शर्त या सीमा के है।

अल्लाह की दरियादिली पर चिंतन (Reflection on Allah’s Generosity)

असीम नेमतें (Infinite Bounties)

  • दुनियावी और रूहानी दोनों नेमतें अल्लाह की दरियादिली का हिस्सा हैं, जो हर सृष्टि को बेमिसाल तरीके से मिलती हैं।

नेमतों का असल स्रोत (Source of All Goodness)

  • सृष्टि में हर दरियादिली और भलाई अल्लाह की रहमत का परिणाम है।
  • इंसान केवल अल्लाह की योजना में एक माध्यम के रूप में कार्य करते हैं।

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