कुरान - 17:2 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَجَعَلۡنَٰهُ هُدٗى لِّبَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ أَلَّا تَتَّخِذُواْ مِن دُونِي وَكِيلٗا

Transliteration: (Wa aatainaa Moosal-Kitaaba wa ja'alnaahu hudal-liBaneee Israaa'eel; allaa tat-takhizoo min doonee wakeelaa)

और हमने मूसा को किताब (तौरात) दी [9] और उसे बनी इस्राईल के लिए हिदायत बनाया [10] (इस हुक्म के साथ) कि मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ (मददगार) न ठहराओ [11]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-इसरा (बनी इस्राईल) – आयत 2 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और हमने मूसा को किताब दी [9] और उसे बनी इस्राईल के लिए हिदायत बनाया [10]... मेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ न ठहराओ [11]।"

[9] हज़रत मूसा को तौरात की अता

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को कोह-ए-तूर पर मुक़द्दस तौरात अता हुई। यह किताब एक ही वक़्त में मुकम्मल तौर पर तख़्तियों पर नाज़िल फ़रमाई गई। दीगर आसमानी किताबों के नुज़ूल के औक़ात: तौरात 6 रमज़ान को, इंजील 13 रमज़ान को, और हज़रत इब्राहीम के सहीफ़े 1 रमज़ान को नाज़िल हुए।

[10] बनी इस्राईल के लिए मख़्सूस हिदायत

तौरात ख़ास तौर पर बनी इस्राईल की क़ौम के लिए हिदायत बनाकर भेजी गई थी; इसके बरअक्स क़ुरआन-ए-पाक तमाम इन्सानों और सारी कायनात के लिए आफ़ाक़ी हिदायत है — "सारे जहाँ के इन्सानों के लिए हिदायत" (सूरह बक़रह)।

[11] अल्लाह ही हक़ीक़ी कारसाज़ है

कारसाज़ (वकील) से मुराद मुतलक़ हाजत-रवा और हक़ीक़ी मदद फ़रमाने वाला है, और वह सिर्फ़ अल्लाह तआला है। दुनिया में अगरचे बन्दे असबाब के तौर पर मदद करते हैं (जैसे हज़रत ईसा का कोढ़ियों को शिफ़ा देना या हज़रत यूसुफ़ के कुर्ते से हज़रत याक़ूब की आँखों की रौशनी लौटना), मगर हक़ीक़ी क़ुदरत और असर केवल अल्लाह ही के इख़्तियार में है।

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