Transliteration: (In ahsantum ahsantum li anfusikum wa in asaatum falahaa; fa izaa jaaa'a wa'dul aakhirati liyasooo'oo wujoo hakum wa liyadkhulul masjida kamaa dakhaloohu awwala marratinw wa liyutabbiroo maa a'law tatbeera)
"अगर तुमने भलाई की तो अपने ही लिए भलाई की, और अगर बुराई की तो अपनी ही जान के लिए [19]... [20]... [21]... [22]... [23]।"
नेकी और बदी का बदला इन्सान की अपनी ज़ात की तरफ़ लौटता है। कोई दूसरे का गुनाह नहीं उठाता, मगर जो दूसरों को गुनाह की राह दिखाए वह उनके गुनाह में भी हिस्सेदार बनता है।
जब बनी इस्राईल ने हज़रत यह्या अलैहिस्सलाम को शहीद किया और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के क़त्ल की साज़िश रची, तो अल्लाह ने रूमी बादशाह (क़ैसर-ए-रूम / हेरोडोस) को उन पर मुसल्लत किया। उसने हज़रत यह्या के ख़ून के बदले सत्तर हज़ार यहूदियों को क़त्ल किया।
रूमी फ़ौजों ने उन्हें इस क़दर ज़लील व रुसवा किया कि ज़िल्लत और दहशत उनके चेहरों से टपकने लगी।
जैसे पहली बार बुख़्त-ए-नसर ने बैतुल मुक़द्दस को तोड़ा था, वैसे ही रोमियों ने मस्जिद-ए-अक़्सा को दोबारा ढहा दिया और उसे वीरान कर दिया।
रूमी फ़ौजों ने उनके तमाम शहरों, बालिग़ों और महलों को ख़ाक में मिला दिया। सूफ़िया फ़रमाते हैं कि ज़कात न देने से कहत पड़ता है और बदकारी से तबाही व क़त्ल आम होता है।
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