Transliteration: (Zurriyyata man hamalnaa ma'a Noohin innahoo kaana 'abdan shakooraa)
"ऐ उन लोगों की औलाद जिन्हें हमने नूह के साथ कश्ती में सवार किया था [12]! बेशक वह बड़े शुक्रगुज़ार बन्दे थे [13]।"
तूफ़ान-ए-नूह के बाद दुनिया की तमाम इन्सानी नसल हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और कश्ती में बचे हुए मोमिनीन की औलाद से फैली है; इसीलिए हज़रत नूह को 'आदम-ए-सानी' (दूसरे आदम) कहा जाता है।
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का अस्ल नाम 'यशकर' था, मगर अल्लाह के ख़ौफ़ से कसरत से रोने और आजिज़ी करने के सबब आपका लक़ब 'नूह' (रोने-धोने वाला) पड़ा। सैकड़ों साल की तकलीफ़ों के बावजूद आप अल्लाह के निहायत शुक्रगुज़ार बन्दे रहे; औलाद को हुक्म हुआ कि वे भी हज़रत नूह के नक़्श-ए-क़दम पर चलकर शुक्रगुज़ारी अपनाएँ।
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