कुरान - 17:3 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
ذُرِّيَّةَ مَنۡ حَمَلۡنَا مَعَ نُوحٍۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَبۡدٗا شَكُورٗا

Transliteration: (Zurriyyata man hamalnaa ma'a Noohin innahoo kaana 'abdan shakooraa)

ऐ उन लोगों की औलाद जिन्हें हमने नूह के साथ कश्ती में सवार किया था [12]! बेशक वह बड़े शुक्रगुज़ार बन्दे थे [13]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-इसरा (बनी इस्राईल) – आयत 3 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"ऐ उन लोगों की औलाद जिन्हें हमने नूह के साथ कश्ती में सवार किया था [12]! बेशक वह बड़े शुक्रगुज़ार बन्दे थे [13]।"

[12] नूह की कश्ती वाले मुहाफ़िज़

तूफ़ान-ए-नूह के बाद दुनिया की तमाम इन्सानी नसल हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और कश्ती में बचे हुए मोमिनीन की औलाद से फैली है; इसीलिए हज़रत नूह को 'आदम-ए-सानी' (दूसरे आदम) कहा जाता है।

[13] अबदन शकूरा (अज़ीम शुक्रगुज़ार बन्दा)

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का अस्ल नाम 'यशकर' था, मगर अल्लाह के ख़ौफ़ से कसरत से रोने और आजिज़ी करने के सबब आपका लक़ब 'नूह' (रोने-धोने वाला) पड़ा। सैकड़ों साल की तकलीफ़ों के बावजूद आप अल्लाह के निहायत शुक्रगुज़ार बन्दे रहे; औलाद को हुक्म हुआ कि वे भी हज़रत नूह के नक़्श-ए-क़दम पर चलकर शुक्रगुज़ारी अपनाएँ।

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