कुरान - 17:34 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلَا تَقۡرَبُواْ مَالَ ٱلۡيَتِيمِ إِلَّا بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُ حَتَّىٰ يَبۡلُغَ أَشُدَّهُۥۚ وَأَوۡفُواْ بِٱلۡعَهۡدِۖ إِنَّ ٱلۡعَهۡدَ كَانَ مَسۡـُٔولٗا

Transliteration: (Wa laa taqraboo maalal yateemi illaa billatee hiya ahsanu hattaa yablugha ashuddah; wa awfoo bil'ahd, innal 'ahda kaana mas'oolaa)

और अनाथ (यतीम) के माल के निकट भी न जाओ, परन्तु ऐसे तरीक़े से जो सबसे उत्तम हो (उसकी भलाई के लिए), यहाँ तक कि वह अपनी परिपक्वता (युवावस्था) को पहुंच जाए। और अपने वादे (अहद) को पूरा करो; निस्संदेह वादे के बारे में (क़यामत के दिन) अवश्य पूछताछ होगी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 34 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] यतीमों के अधिकारों की सुरक्षा और वादे की पाबंदी

अनाथ बच्चों के माल को हड़पना या बर्बाद करना हराम है। संरक्षक को केवल अमानतदार बनकर उसके माल की हिफ़ाज़त और व्यापार में वृद्धि करनी चाहिए जब तक कि वह समझदार न हो जाए। साथ ही हर वादे और समझौते की जवाबदेही अल्लाह के सामने होगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now