कुरान - 45:2 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَكِيمِ

Transliteration: (Tanzeelul Kitaabi minal laahil 'Azeezil Hakeem)

इस किताब का नाज़िल होना अल्लाह की तरफ़ से है, जो इज़्ज़त वाला, हिकमत वाला [2] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 2

"इस किताब का नाज़िल होना अल्लाह की तरफ़ से है, जो इज़्ज़त वाला, हिकमत वाला [2] है।"

[2] क़ुरआन-ए-करीम का नुज़ूल और सिफ़ात-ए-इलाही

अल्लाह तआला का ‘इज़्ज़त वाला’ (अज़ीज़) होना यह साबित करता है कि उसका कोई शरीक नहीं और उसकी ज़ात व क़ुदरत मुतलक़ और ग़ालिब है। उसका ‘हिकमत वाला’ (हकीम) होना यह ज़ाहिर करता है कि उसका कोई भी काम हिकमत से ख़ाली नहीं होता।

चूँकि यह मुक़द्दस किताब उस ज़ात-ए-अक़दस की तरफ़ से नाज़िल हुई है, इसलिए इसके अहकाम, पैग़ाम और हिदायात भी हिकमत और सच्चाई से भरपूर हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now