कुरान - 45:3 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
إِنَّ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ لَأٓيَٰتٖ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Innaa fis samaawaati wal ardi la Aayaatil lilmu'mineen)

बेशक आसमानों और ज़मीन में ईमान वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ [3] हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 3

"बेशक आसमानों और ज़मीन में ईमान वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ [3] हैं।"

[3] कायनात में इलाही निशानियाँ

इस आयत में आसमानों और ज़मीन की तख़लीक़, सूरज, चाँद और सितारों की गर्दिश को ईमान वालों के लिए अल्लाह की वहदानियत और क़ुदरत की खुली निशानियाँ क़रार दिया गया है।

अगरचे ये अज़ीम निशानियाँ हर इंसान के सामने हैं, लेकिन इनसे हक़ीक़ी फ़ायदा सिर्फ़ मोमिनीन ही हासिल करते हैं, क्योंकि वे तफ़क्कुर और बसीरत की नज़र से देखते हैं।

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