कुरान - 45:4 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَفِي خَلۡقِكُمۡ وَمَا يَبُثُّ مِن دَآبَّةٍ ءَايَٰتٞ لِّقَوۡمٖ يُوقِنُونَ

Transliteration: (Wa fee khalaqikum wa maa yabussu min daaabbatin Aayaatul liqawminy-yooqinoon)

और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन जानवरों में जिन्हें वह फैलाता है, यक़ीन रखने वाली क़ौम के लिए निशानियाँ [4] हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 4

"और तुम्हारी अपनी पैदाइश में, और उन जानवरों में जिन्हें वह फैलाता है, यक़ीन रखने वाली क़ौम के लिए निशानियाँ [4] हैं।"

[4] इंसानी वजूद और जानदारों में क़ुदरत के जलवे

इंसान की अपनी तख़लीक़—नुत्फ़े से लेकर गोश्त-पोस्त, हड्डियों और रूह फूँकने तक—और ज़मीन पर रेंगने व चलने वाले तरह-तरह के जानवरों की अनगिनत नस्लों का वजूद, अल्लाह की अज़ीम क़ुदरत का साफ़ सुबूत हैं।

ये निशानियाँ उन लोगों के लिए यक़ीन और ईमान में इज़ाफ़े का ज़रिया बनती हैं जो अक़्ल-ओ-फ़िक्र से काम लेते हैं।

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