कुरान - 45:20 सूरह अल-जासिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
هَٰذَا بَصَـٰٓئِرُ لِلنَّاسِ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّقَوۡمٖ يُوقِنُونَ

Transliteration: (Haazaa basaaa'iru linnaasi wa hudanw wa rahmatul liqawminy yooqinoon)

यह (क़ुरआन) तमाम इंसानों के लिए आँखों की रौशनी (बसीरत) है, और यक़ीन रखने वाली क़ौम के लिए हिदायत (41) और रहमत है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-जासिया आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-जासिया तफ़सीर - आयत 20

"यह (क़ुरआन) तमाम इंसानों के लिए आँखों की रौशनी (बसीरत) है, और यक़ीन रखने वाली क़ौम के लिए हिदायत [41] और रहमत है।"

[41] क़ुरआन-ए-पाक के तीन अज़ीम फ़ायदे

इस आयत में क़ुरआन-ए-करीम के तीन अज़ीम फ़ज़ाइल बयान किए गए हैं:

  1. यह बसीरत (आँखों की रौशनी) है जो दिलों को बेदार करती है और रूहानी हयात बख़्शती है।

  2. यह हिदायत है जो दुनिया में नेक राह दिखाती है और आख़िरत में जन्नत की तरफ़ ले जाती है।

  3. यह रहमत है जो दोनों जहानों में बंदे को अल्लाह के फ़ज़्ल से मालामाल करती है।

ये तमाम फ़ज़ाइल उन लोगों के लिए मख़सूस हैं जो सच्चे दिल से ईमान और यक़ीन रखते हैं।

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