कुरान - 18:96 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ءَاتُونِي زُبَرَ ٱلۡحَدِيدِۖ حَتَّىٰٓ إِذَا سَاوَىٰ بَيۡنَ ٱلصَّدَفَيۡنِ قَالَ ٱنفُخُواْۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَعَلَهُۥ نَارٗا قَالَ ءَاتُونِيٓ أُفۡرِغۡ عَلَيۡهِ قِطۡرٗا

Transliteration: (Aatoonee zubaral hadeed, hattaaa izaa saawaa bainas sadafaini qaalan fukhoo hattaaa izaa ja'alahoo naaran qaala aatooneee ufrigh 'alaihi qitraa)

'मेरे पास लोहे के बड़े-बड़े तख़्ते (सिलें) लाओ'; यहाँ तक कि जब उन्होंने दोनों पहाड़ों के दरमियानी हिस्से को बराबर कर दिया, तो कहा, 'धौंकनी चलाओ (आग दहकाओ)'; यहाँ तक कि जब उसे बिल्कुल आग (लाल सुर्ख़) बना दिया, तो कहा, 'लाओ, मैं इस पर पिघला हुआ तांबा उंडेल दूँ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 96 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 96

✅ लोहे और पिघले तांबे की अज़ीम दीवार (इंजीनियरिंग का कमाल)

ज़ुलक़रनैन ने लोहे की बड़ी-बड़ी सिलों से दोनों पहाड़ों के बीच की पूरी घाटी को भर दिया। फिर आग की भट्ठियाँ धौंकवाकर उस लोहे को दहकता हुआ लाल कर दिया, और फिर उस पर पिघला हुआ तांबा उंडेल दिया। इस तरह लोहा और तांबा मिलकर एक ऐसी इन्तेहाई मज़बूत और चिकनी चट्टान बन गए जिसमें न जंग लग सकता था और न कोई दरार आ सकती थी।

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