Transliteration: (Kazaalika yatba'ul laahu 'alaa quloobil lazeena laa ya'lamoon)
"इसी तरह अल्लाह उन लोगों के दिलों पर मुहर लगा देता है [131] जो समझ नहीं रखते।"
यह आयत तालीम देती है कि जब लोग मुसलसल हक़ को झुठलाते हैं और अंबिया व मोमिनीन को झूठा कहते हैं, तो अल्लाह उनके दिलों पर मुहर लगा देता है। यह मुहर लगना उनके अपने लगातार इंकार और जहालत का नतीजा होता है। यह एक ऐसा रूहानी पर्दा है जो उन्हें हिदायत समझने और क़बूल करने से महरूम कर देता है। अल्लाह तआला हमें इस अज़ाब से महफ़ूज़ रखे।
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