Transliteration: (Wa aakharoo na'tarafoo bizunoobihim khalatoo 'amalan saalihanw wa aakhara saiyi'an 'asal laahu 'any yatooba 'alaihim; innal laaha Ghafoorur Raheem)
यहाँ जिन बुरे आमाल का ज़िक्र है, उनसे मुराद ग़ज़वा-ए-तबूक में शिरकत न करना है। कुछ मोमिन अपने सच्चे ईमान के बावजूद अलग-अलग वजहों से जंग में शामिल न हो सके। उनकी यह ग़ैर-शिरकत अल्लाह के नज़दीक बुरा अमल मानी गई, हालाँकि उनके दिल नदामत और तौबा से भरे हुए थे।
यह आयत उन सच्चे मोमिनों के बारे में उतरी जो ग़ज़वा-ए-तबूक में शिरकत न कर सके। ये मोमिन बड़ी नदामत से भरकर अपने गुनाहों का इक़रार करते हुए तौबा चाहते थे। उनमें से कुछ ने तो यहाँ तक कर दिया कि ख़ुद को खंभों से बाँध लिया और अहद किया कि जब तक नबी करीम ﷺ ख़ुद उन्हें न खोलें, वे ख़ुद को नहीं खोलेंगे। जब नबी ﷺ को इसका पता चला, तो आपने फ़रमाया: "अल्लाह की क़सम, मैं उन्हें तब तक नहीं खोलूँगा जब तक अल्लाह उनकी आज़ादी का हुक्म न दे।"
उनकी सच्ची तौबा के जवाब में यह आयत उतरी। फिर नबी ﷺ ने उन्हें खोला, और उन्होंने अपनी नदामत का इज़हार करते हुए कहा: "हमारा यही माल हमारी ख़ता का सबब बना। हम चाहते हैं कि आप इसे ख़ैरात के तौर पर क़बूल करें और हमें पाक करने की दुआ फ़रमाएँ।" इस पर यह आयत उतरी: "ऐ प्यारे नबी! उनके माल में से ज़कात लो" (सूरा 9:103)।
यह दिखाता है कि सच्ची तौबा, रूहानी तहारत की चाहत के साथ, अल्लाह की बारगाह में क़बूल हो सकती है, और ज़रूरी है कि माल को रूह को पाक करने के लिए ख़ैरात में ख़र्च किया जाए।
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