कुरान - 9:112 सूरह अत-तौबा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

112
ٱلتَّـٰٓئِبُونَ ٱلۡعَٰبِدُونَ ٱلۡحَٰمِدُونَ ٱلسَّـٰٓئِحُونَ ٱلرَّـٰكِعُونَ ٱلسَّـٰجِدُونَ ٱلۡأٓمِرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَٱلنَّاهُونَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡحَٰفِظُونَ لِحُدُودِ ٱللَّهِۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ,

Transliteration: (At taaa'iboonal 'aabidoonal haamidoonas saaa'ihoonar raaki'oonas saajidoonal aamiroona bilma'roofi wannaahoona 'anil munkari walhaafizoona lihudoodil laah; wa bashshiril mu'mineen)

वे वही लोग हैं जो तौबा [314] करते हैं, इबादत करते हैं, हम्द करते हैं, रोज़े रखते हैं, रुकूअ करते हैं, सजदा करते हैं, नेकी का हुक्म देते हैं और बुराई से रोकते हैं, और अल्लाह की हदों [315] की हिफ़ाज़त करते हैं। और मोमिनों को ख़ुशख़बरी सुना दो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तौबा आयत 112 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अत-तौबा – आयत 112 की तफ़्सीर

✅ [314] तौबा हर इबादत से पहले है

इससे मुराद यह है कि ये लोग भी जन्नत के हक़दार हैं। अगर किसी मोमिन को जिहाद में शिरकत का मौका न मिले, तो उसे अल्लाह तआला की इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए (रूहुल बयान)। इससे हम सीखते हैं कि तौबा हर क़िस्म की इबादत पर मुक़द्दम है।

✅ [315] सच्चे मोमिन की निशानियाँ और सामाजिक फ़र्ज़

ऊपर जिन नेक आमाल का ज़िक्र हुआ, वे सच्चे मोमिन की निशानियाँ हैं। मोमिन के लिए सिर्फ़ ख़ुद नेक होना काफ़ी नहीं, बल्कि उसके लिए यह भी ज़रूरी है कि दूसरों को नेक बनाने की कोशिश करे।

साथ ही तब्लीग़ (पहुँचाने) का काम सिर्फ़ उलेमा पर ही फ़र्ज़ नहीं, बल्कि हर मोमिन पर फ़र्ज़ है, जैसा "रोको" (अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुनकर) से समझा जाता है। इसके अलावा मोमिन को हर नेक काम पर अमल करना चाहिए और हर क़िस्म के बड़े और छोटे गुनाहों से बचना चाहिए, जैसा "हिफ़ाज़त" (पाबंदी) से समझा जाता है।

कभी पानी की एक बूँद ज़िंदगी बचा सकती है, और कभी एक छोटी सी चिंगारी पूरा घर जला सकती है। किसी नेक काम को छोटा समझकर न छोड़ो, और किसी गुनाह को मामूली समझकर मत करो।

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