Transliteration: (At taaa'iboonal 'aabidoonal haamidoonas saaa'ihoonar raaki'oonas saajidoonal aamiroona bilma'roofi wannaahoona 'anil munkari walhaafizoona lihudoodil laah; wa bashshiril mu'mineen)
इससे मुराद यह है कि ये लोग भी जन्नत के हक़दार हैं। अगर किसी मोमिन को जिहाद में शिरकत का मौका न मिले, तो उसे अल्लाह तआला की इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए (रूहुल बयान)। इससे हम सीखते हैं कि तौबा हर क़िस्म की इबादत पर मुक़द्दम है।
ऊपर जिन नेक आमाल का ज़िक्र हुआ, वे सच्चे मोमिन की निशानियाँ हैं। मोमिन के लिए सिर्फ़ ख़ुद नेक होना काफ़ी नहीं, बल्कि उसके लिए यह भी ज़रूरी है कि दूसरों को नेक बनाने की कोशिश करे।
साथ ही तब्लीग़ (पहुँचाने) का काम सिर्फ़ उलेमा पर ही फ़र्ज़ नहीं, बल्कि हर मोमिन पर फ़र्ज़ है, जैसा "रोको" (अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुनकर) से समझा जाता है। इसके अलावा मोमिन को हर नेक काम पर अमल करना चाहिए और हर क़िस्म के बड़े और छोटे गुनाहों से बचना चाहिए, जैसा "हिफ़ाज़त" (पाबंदी) से समझा जाता है।
कभी पानी की एक बूँद ज़िंदगी बचा सकती है, और कभी एक छोटी सी चिंगारी पूरा घर जला सकती है। किसी नेक काम को छोटा समझकर न छोड़ो, और किसी गुनाह को मामूली समझकर मत करो।
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