Transliteration: ('A wa laa yarawna annahum yuftanoona fee kulli 'aamin marratan 'aw marrataini thumma laa yatooboona wa laa hum yazzakkaroon)
यह आयत बार-बार होने वाली आज़माइशों की तरफ़ इशारा करती है — जैसे बीमारियाँ, काल और आफ़तें — जो हर साल एक-दो बार इलाही इम्तिहान की सूरत में आती हैं। सच्चा मोमिन ऐसी मुश्किलों को चेतावनी या याद दहानी समझता है, और उन पर ग़ौर करता है कि या तो वे गुनाहों की सज़ा हैं या सब्र और ईमान के इम्तिहान।
इसके उलट काफ़िर इन वाक़ियों को सिर्फ़ ज़माने की आफ़तें या माली नुक़सान समझते हैं, और उनके पीछे का रूहानी पैग़ाम देखने में नाकाम रहते हैं। इसलिए इन आज़माइशों के बावजूद वे न तौबा करते हैं और न सबक़ लेते हैं, और मुसीबत के असली मक़सद से अंधे रहते हैं।
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