Transliteration: (Wa izaa maaa unzilat Sooratun nazara ba'duhum ilaa ba'din hal yaraakum min ahadin thumman sarafoo; sarafal laahu quloobahum bi annahum qawmul laa yafqahoon)
यह मुनाफ़िक़ों की तरफ़ इशारा है, जो सूरा नाज़िल होने की आवाज़ सुनकर एक-दूसरे की तरफ़ देखने लगते थे — या तो अपनी निगाहों से उसका मज़ाक़ उड़ाने के लिए, या महफ़िल से भागने का बहाना ढूँढने के लिए। दूसरा मतलब ज़्यादा मज़बूत है, क्योंकि यह इलाही कलाम की मौजूदगी में उनकी बेचैनी को दिखाता है। इससे समझा जाता है कि ज़िक्र की महफ़िलों से बचना या दीनी इज्तिमाओं के लिए नफ़रत दिखाना निफ़ाक़ की निशानी है।
उनके लगातार इनकार और मज़ाक़ की वजह से अल्लाह ने उनके दिलों को हिदायत से फेर दिया। यह दस्त-बरदारी उनकी समझ और रूहानी हिस की कमी से पैदा हुई। यह यह भी दिखाता है कि जो शख़्स नबी करीम ﷺ की बरकत वाली बारगाह और हाज़िरी से कट जाता है, वह रूहानी जहालत और गुमराही की हालत में छोड़ दिया जाता है।
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